वागधारा संस्था द्वारा गठित ग्राम स्वराज समूह एवं बाल स्वराज समूह व ग्रामीणों ने पर्यावरण को बचाने हेतु 2000 बीज बोल बनाई।

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BN बांसवाड़ा न्यूज़ – ग्राम पंचायत देवदा साथ ब्लॉक कुशलगढ़ में वागधारा संस्था द्वारा गठित ग्राम स्वराज समूह एवं बाल स्वराज समूह व ग्रामीणों ने पर्यावरण को बचाने हेतु 2000 बीज बोल बनाई जिसमें मिट्टी ,पानी, गोबर और 8 से 10 प्रकार के बीच जिनमें सहजन, आम ,जामुन नीम, देसी बबूल ,महुआ, सीताफल टिमरू ,खजूर सहित 10 प्रकार के बीजों को एक साथ मिलाकर बीज बोल बनाकर जंगल में डाली गई जो बारिश आने पर स्वत ही उग जाएंगे वागधारा संस्था के क्षेत्रीय सहजकर्ता दीपक पारेख ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकाश डालते हूए बताया की विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है ताकि पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरुकता बढ़ाई जा सके और लोग उनसे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित हो सकें। लोगों को पर्यावरण से जुड़े उन मुद्दों के बारे में पता होना चाहिए,

जो आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बनने जा रहे हैं। आने वाली पीढ़ी को बड़ी समस्याओं से बचाने के लिए समय रहते कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सबसे पहला कदम यही होना चाहिए कि हर व्यक्ति पर्यावरण के देखभाल को अपना फर्ज समझे। वागधारा संस्था के सामुदायिक सहजकर्ता दीपिका कटारा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है, जो व्यक्तिगत, समुदाय और वैश्विक स्तर पर कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यह इस बात की भी याद दिलाता है कि आज की पीढ़ी को आने वाली जनरेशन के लिए पर्यावरण को संरक्षित और संरक्षित करना कितना महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई, प्रदूषण, उन मुद्दों में से हैं, जो इस दिन सरकारों, संगठनों और व्यक्तियों को संबोधित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि प्लास्टिक का इस्तेमाल इस वक्त पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है और हमें इसके इस्तेमाल को रोकने पर ध्यान देना चाहिए। और प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसके वैकल्पिक तरीकों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसी के साथ वहां पर उपस्थित सदस्यों व ग्रामीणों ने पर्यावरण बचाने वह पेड़ लगाने के नारे लगाते हुए आने वाली पीढ़ी के लिए पेड़ लगाए जाए जिससे वह अपना जीवन यापन व अपनी जरूरतों के हिसाब से उनका उपयोग करें और जंगल को हरा-भरा बनाए बनाया जाए और हर सदस्य ने हर वर्ष 5 पेड़ लगाने की शपथ ली इसी के साथ नारा लगाया सब ने मिलकर ठाना है पर्यावरण को बचाना है नारा लगाते हुए रैली निकाली
इन सब बातों को सुनकर देख कर मानो ऐसा प्रतीत हुआ कि आज भी आदिवासी समुदाय में एकता और पर्यावरण के प्रति सजगता दिखती है और इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतू कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के सदस्य शंकर देवदा भुर्जी कटारा, कमलेस डामोर ,राकेश, कमला, रमेस, प्रकाश, कालादेवी, दीपूदेवी कलसिंग, दिनेस,भुरीदेवी, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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