सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाई, सजा पर निचली अदालत पर सवाल उठाए

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नई दिल्ली : ‘सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों होता है’ टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार करने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (4 अगस्त) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने के साथ, उनकी अयोग्यता भी अब स्थगित हो गई है। राहुल गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं। शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी की तरफ से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने तर्क रखे। राहुल की याचिका पर जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ पूर्व सांसद की याचिका पर सुनवाई की। अदालत की ओर से दोनों पक्षों को 15-15 मिनट का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बात एक व्‍यक्ति के अधिकार की नहीं है, एक सांसद की है। ट्रायल कोर्ट के जज ने अधिकतम सजा दी है, उन्‍हें इसकी वजह भी बतानी पड़ेगी। बता दें कि राहुल गांधी ने आपराधिक मामले में सजा पर रोक लगाने की उनकी अर्जी खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले मोदी सरनेम मामले में दोषसिद्धि के कारण निचली अदालत ने संसद सदस्य के रूप में राहुल गांधी को अयोग्य घोषित कर दिया था।विस्तृत जानकारी अनुसार आपराधिक मानहानि का मामला 2019 के लोकसभा अभियान के दौरान गांधी द्वारा की गई एक टिप्पणी पर दायर किया गया था। ललित मोदी, नीरव मोदी जैसे लोगों का जिक्र करते हुए गांधी ने पूछा था, ”सभी चोरों का उपनाम एक जैसा क्यों होता है? 23 मार्च, 2023 को सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने गांधी को दोषी ठहराया और 2 साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें लोकसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालाँकि, ऊपरी कोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर दी थी और उसी दिन उन्हें जमानत भी दे दी गई थी ताकि वह 30 दिनों के भीतर अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील कर सकें।3 अप्रैल को, राहुल गांधी ने अपनी दोषसिद्धि पर आपत्ति जताते हुए सूरत सत्र न्यायालय का रुख किया और अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की, जिसे 20 अप्रैल को खारिज कर दिया गया। हालांकि, सूरत सत्र न्यायालय ने 3 अप्रैल को गांधी को उनकी अपील के निपटारे तक जमानत दे दी।

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