महिसागर (गुजरात)। महिसागर जिले के वीरपुर शरीफ में हजरत ख्वाजा महमूद दरियाई दूल्हा सरकार की दरगाह पर सालाना उर्स-ए-मुबारक का आयोजन 20 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। उर्स के दौरान गुजरात के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से अकीदतमंदों और जायरीनों के वीरपुर शरीफ पहुंचने की उम्मीद है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार उर्स में संदल शरीफ, चादरपोशी, फातेहा, सलाम, नात-मनकबत और दुआ सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आस्था और रूहानियत का प्रमुख केंद्र
वीरपुर शरीफ की दरगाह लंबे समय से अकीदतमंदों के लिए आस्था और रूहानियत का केंद्र रही है। यहां आने वाले जायरीन दुआ, शांति और सेवा की भावना के साथ दरगाह पर हाजिरी पेश करते हैं।
ख्वाजा महमूद दरियाई के बारे में सूफी साहित्य में भी उल्लेख मिलता है। सूफीनामा के अनुसार काजी महमूद दरियाई को “दरियाई दूल्हा” के नाम से जाना जाता था और गुजरात की सूफी परंपरा में उनका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
संदल शरीफ और चादरपोशी के कार्यक्रम
उर्स के दौरान संदल शरीफ, चादरपोशी, फातेहा, सलाम, नात-मनकबत और विशेष दुआ जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जायरीनों के शामिल होने की संभावना है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार इस्लामिक चांद की तारीखों के अनुसार सातवीं चांद से ग्यारहवीं चांद तक लंगर की परंपरा भी निभाई जाती है। श्रद्धालुओं के लिए दिन में दो बार शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है।
करीब 30 वर्षों से हिंदू परिवार कर रहा लंगर सेवा
वीरपुर शरीफ के उर्स की खास परंपराओं में लंबे समय से चली आ रही लंगर सेवा भी शामिल है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार मुंबई के बबला भाई पटेल, डॉ. वीनाबेन पटेल और उनका परिवार करीब 30 वर्षों से दरगाह पर आने वाले जायरीनों के लिए लंगर सेवा करता आ रहा है।
धर्म की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं को भोजन परोसने की यह सेवा वीरपुर शरीफ के उर्स में आपसी प्रेम, भाईचारे और मानव सेवा का संदेश देती है। 2025 के उर्स की रिपोर्ट में भी इस परिवार की करीब तीन दशक पुरानी लंगर सेवा का उल्लेख किया गया था।
कई राज्यों से पहुंचेंगे जायरीन
उर्स के अवसर पर गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा से अकीदतमंदों के वीरपुर शरीफ पहुंचने की उम्मीद है। उलेमा-ए-किराम और धार्मिक विद्वानों के भी कार्यक्रमों में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
श्रद्धालुओं की सेवा के इंतजाम
दरगाह के खिदमतगार सैयद सानू बापू दराई के अनुसार उर्स से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
वीरपुर शरीफ में वर्षों से चली आ रही लंगर और खिदमत की परंपरा उर्स को धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सेवा और भाईचारे से जोड़ती है।
20 से 26 सितंबर तक रहेगा अकीदत का माहौल
20 से 26 सितंबर 2026 तक वीरपुर शरीफ में उर्स-ए-मुबारक के दौरान दरगाह परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। संदल शरीफ, चादरपोशी, नात-मनकबत, दुआ और लंगर के दौरान बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है।
वीरपुर शरीफ का यह उर्स धार्मिक आस्था के साथ सेवा, आपसी प्रेम और भाईचारे की परंपरा के लिए भी जाना जाता है।
📰 भोर नायक (साप्ताहिक समाचार पत्र) | प्रधान संपादक- शहज़ाद ख़ान – बांसवाड़ा ब्यूरो saeed Mirza
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