राजस्थान पुलिस की साइबर एडवाइजरी: मोबाइल को हैकिंग और Botnet Malware से बचाने के लिए eScan CERT-In Bot Removal App इस्तेमाल करने की अपील

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po cyber alerat
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जयपुर, 3 सितंबर। साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के बीच राजस्थान पुलिस ने आमजन को मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने लोगों से फिशिंग लिंक, Botnet Malware, ट्रोजन और अन्य साइबर खतरों से सतर्क रहने की अपील की है।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग फिशिंग लिंक के माध्यम से मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों में Botnet Malware संक्रमित कर सकते हैं। इसके बाद निजी जानकारी, मोबाइल एप्लीकेशन और संवेदनशील बैंकिंग विवरण तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है। इससे यूजरनेम, पासवर्ड और नेट बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है।

eScan CERT-In Bot Removal App से मिलेगी सुरक्षा

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर खतरों से बचाव के लिए भारत सरकार के भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए eScan CERT-In Bot Removal App विकसित किया गया है।

यह एप मोबाइल में मौजूद खतरनाक Bot, Malware, Trojan और अन्य साइबर खतरों की पहचान करने तथा उन्हें हटाने में मदद करता है। एप मोबाइल एप्लीकेशन को दी गई संवेदनशील अनुमतियों पर भी नजर रखने में सहायता करता है।

एप की प्रमुख विशेषताएं

  • मोबाइल में छिपे वायरस, स्पाईवेयर, एडवेयर और Botnet संक्रमण की जांच।
  • संदिग्ध और खतरनाक एप की पहचान में मदद।
  • खतरनाक फाइल या एप को हटाने अथवा अलग रखने की सुविधा।
  • नए साइबर खतरों की पहचान के लिए नवीनतम सुरक्षा जानकारी उपलब्ध।

ऐसे करें eScan CERT-In Bot Removal App का इस्तेमाल

  1. Google Play Store से eScan CERT-In Bot Removal App इंस्टॉल करें।
  2. एप को आवश्यक अनुमतियां प्रदान करें।
  3. एंटीवायरस विकल्प में जाकर Full Scan शुरू करें।
  4. वायरस या खतरनाक फाइल मिलने पर उसे हटाएं या अलग रखें।
  5. जांच पूरी होने के बाद मोबाइल को Restart करें।

मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस की सलाह

राजस्थान पुलिस ने लोगों से WhatsApp में Two-Step Verification सक्रिय रखने की अपील की है। साथ ही एप्लीकेशन केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से डाउनलोड करने तथा अज्ञात वेबसाइटों से APK फाइल डाउनलोड करके इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी गई है।

किसी भी एप को इंस्टॉल करते समय केवल आवश्यक Permissions ही देने, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लीकेशन को नियमित रूप से अपडेट रखने तथा बैंक खाते एवं डिजिटल भुगतान से जुड़े लेन-देन पर लगातार नजर रखने की भी सलाह दी गई है।

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क

राजस्थान पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी होने या ठगी का प्रयास किए जाने पर बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें। इसके अलावा नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में शिकायत की जा सकती है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। साइबर हेल्पडेस्क नंबर- 9256001930 और 9257510100 – पर भी सूचना देने की अपील की गई है।

बांसवाड़ा एसपी सुधीर जोशी ने भी की आमजन से अपील

जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने बांसवाड़ा जिले के आमजन से अपील करते हुए कहा कि डिजिटल लेनदेन और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का जोखिम भी बढ़ रहा है। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और सरकार द्वारा अधिकृत सुरक्षा एप्स का उपयोग लोगों को वित्तीय नुकसान एवं साइबर ठगी से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

उन्होंने नागरिकों से किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक, लुभावने मैसेज और अनधिकृत APK फाइलों से पूरी तरह सावधान रहने तथा साइबर सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है।

📰 भोर नायक (साप्ताहिक समाचार पत्र) | प्रधान संपादक- शहज़ाद ख़ान – बांसवाड़ा ब्यूरो saeed Mirza
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