विश्व पर्यावरण दिवस पर मियांवाकी वृक्षारोपण अभियान आयोजित, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (1)
विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (1)

बांसवाड़ा, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत शुक्रवार को गढ़ी स्थित क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय परिसर में मियांवाकी वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन तथा हरित आवरण बढ़ाने का संदेश दिया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (2)
विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (2)

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गढ़ी विधायक कैलाश चन्द्र मीणा रहे, जबकि अध्यक्षता जिला कलक्टर इन्द्रजीत यादव ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में समाजसेवी पूंजीलाल गायरी एवं पूर्व मंत्री धनसिंह रावत उपस्थित रहे।

अभियान के अंतर्गत मियांवाकी पद्धति से विभिन्न देशी प्रजातियों के पौधों का सघन रोपण किया गया। इस दौरान वन सुरक्षा समिति के सदस्यों को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया गया। अतिथियों ने पौधारोपण के साथ नर्सरी का निरीक्षण कर पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में उप वन संरक्षक बांसवाड़ा अभिषेक शर्मा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलाश बसेर, उपखंड अधिकारी गढ़ी श्रवणसिंह राठौड़, गोविन्दसिंह राव, लाभचन्द पटेल, रोनक पटेल, योगेश भट्ट, महेन्द्रसिंह चौहान, भेमजी भाई पाटीदार, मनोहर पटेल, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रवीण अहारी, रेंजर देवीलाल मीणा, नारायणलाल सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (3)
विश्व पर्यावरण दिवस एवं वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान (3)

इस अवसर पर कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। उपस्थित सभी लोगों ने पौधों की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया। अतिथियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

कार्यक्रम में जल संरक्षण, हरित विकास और प्रकृति के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया।

उप वन संरक्षक अभिषेक शर्मा ने बताया कि मियांवाकी पद्धति जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित वनीकरण तकनीक है। इस तकनीक में कम स्थान पर देशी प्रजातियों के पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे पारंपरिक विधियों की तुलना में लगभग 10 गुना तेजी से और 30 गुना अधिक घने जंगल विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन भवानीसिंह ने किया तथा आभार सहायक वन संरक्षक अभिनव मालव ने व्यक्त किया।

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